जहां पर हम हैं ~BY ROSELIN SWAMY

जहां पर हम हैं

फूल खिलते हैं सूरज चमकता है
चिड़िया उड़ती है कोयल गाती है
रात बीत जाती है सुबह फिर होती है,
सब अपने-अपने काम में व्यस्त हो जाते है
अरे इंसान, तुम क्यों वैसे के वैसे ही हो?
थोड़ा कुछ सीखो इन सबसे
यह हमें सिखाते हैं किस तरह
हर एक दिन भरोसे के साथ जिया जाता है
कुछ पाना है तो मुश्किल रास्तों में चलना पड़ेगा,
अगर मुमकिन नहीं है,
तो जिंदगी में जीत कैसे हासिल होगी,
हमारे पास जो है उसे कायम रखना जरूरी है
क्या कभी किसी मछली को जल से बाहर
आते हुए देखा है? नहीं, क्योंकि वह मछली जानती है
बिना पानी के रह नहीं सकती,
बेचारा इंसान यह क्यों भूल जाता है
कि जिंदगी में कुछ पाने के लिए हमें मेहनत करना पड़ता है
जहां पर हम हैं वहीं पर हमें ऊंचा उठना चाहिए
लेकिन हम अपनी जगह को छोड़कर कहीं और जाकर,
कोशिश करते हैं
आओ हम सब प्रयत्न करें कि जहां पर हम हैं
वहीं पर ऊंचे उठे और हमारा देश का नाम रोशन करें

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Featured image credits to AndreasAux on Pixabay

                                               
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